‘हम तुम्हें वोट नहीं देंगे’, लेबर पार्टी ने कश्मीर पर सुर बदला तो कट्टरपंथियों की हवा हुई टाइट

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लगता है UK की लेबर पार्टी की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। अभी कश्मीर को लेकर उन्होंने भारत के पक्ष में अपने विचार क्या रखे, उनका प्रिय वोट बैंक ही उन्हें आंखें दिखाने लगा। यूके में स्थित करीब 100 मस्जिदों ने कहा है कि लेबर पार्टी के वर्तमान प्रमुख सर Keir Starmer ने यदि अपना बयान वापिस नहीं लिया, तो वो लेबर पार्टी से अपना समर्थन वापिस ले लेंगे।

इस पत्र के अनुसार, “मुस्लिम कोरोनावायरस मरीजों को अस्पताल से भगाया जा रहा है, कश्मीर आठ महीने से ज़्यादा लॉकडाउन में है, और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने की कई ज़िम्मेदारियों से पीछे हट रहा है। इसलिए इसे (कश्मीर)  द्विपक्षीय मामला ना बनाए, वरना हम लेबर पार्टी से अपना समर्थन वापिस लेंगे।

परन्तु लेबर पार्टी ने आखिर ऐसा क्या बोला कि यूके की मस्जिदें इतनी हमलावर हो गई? दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और लेबर पार्टी प्रमुख 30 अप्रैल को labour Party के नए अध्यक्ष सर काइर स्टार्मर और लेबर फ़्रेंड्स ऑफ इंडिया ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था,

हमें भारतीय उपमहाद्वीप के मामलों को यहां उठाकर समुदायों के बीच किसी तरह के मतभेद को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। भारत और कश्मीर में कोई भी मुद्दा भारतीय संसद के तहत आता है। पाकिस्तान और भारत दोनों देशों को शांतिप्रिय ढंग से इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए। ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लोग इतना योगदान देते हैं, अब हमें उनके साथ दोबारा सहयोग बढ़ाने पर काम करना होगा”।

लेबर पार्टी इस कथन से मुस्लिम समुदाय नाराज हो गया है क्योंकि वो चाहता है कि labour Party भारत के प्रति अपने विरोधी रुख को बनाये रखे। हालाँकि, labour Party इस मूड में बिलकुल नजर नहीं आ रही जिस वजह से यूके के मस्जिदों ने इस पार्टी को समर्थन वापिस लेने की धमकी दे डाली। ऐसे में labour Party कैसे अपने वोट बैंक को बचाने के लिए क्या करती है ये तो बाद की बात है पर ये विरोधी इस पार्टी के लिए नयी मुसीबत खड़ी कर सकता है।

बता दें कि लेबर पार्टी का प्रारंभ से ही काफी भारत विरोधी रवैया रहा है। भारत में इस पार्टी को इसलिए भी हेय की दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि इसी के नेता Clement Attlee के नेतृत्व में भारत का विभाजन कर अंग्रेज़ यहां से निकले थे।

इसके अलावा लेबर पार्टी को इसलिए भी अपने सुर बदलने पड़े थे क्योंकि उनके पाकिस्तान और इस्लाम समर्थक रवैये के कारण उनकी पार्टी को पिछले वर्ष के लोकसभा चुनाव में करारी हार प्राप्त हुई थी। बता दें कि जब भारत ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था, तो यूके की विपक्षी लेबर पार्टी को इससे बहुत तकलीफ पहुंची थी।

लेबर पार्टी को पाकिस्तान परस्त माना जाता है, क्योंकि ब्रिटेन में बसे पाकिस्तानी मूल के नागरिक आमतौर पर labour Party का ही समर्थन करते हैं। इसी पाकिस्तानी परस्ती में labour Party के नेता जेरेमी कोर्बिन ने जहां कश्मीर को लेकर भारत विरोधी बयान दे डाला था, तो वहीं आधिकारिक तौर पर लेबर पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार की निंदा तक कर डाली थी। हालांकि, बाद में लेबर पार्टी ने कश्मीर मुद्दे पर यू-टर्न लेते हुए कश्मीर को भारत और पाकिस्तान का मुद्दा बताया था और कश्मीर में किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप का विरोध किया था।

लेबर पार्टी के इस भारत विरोधी रुख के कारण भारतीय समुदाय के वोटर्स का झुकाव कंजरवेटिव पार्टी की ओर बढ़ गया और बोरिस जॉनसन ने भी इसका फायदा उठाने में देर नहीं लगाई। बोरिस जॉनसन को आमतौर पर भारत का समर्थक माना जाता है, और उनके चुनावी वादों में भी यह साफतौर पर देखने को मिला है।

उन्होंने चुनावों से ठीक एक दिन पहले ही कहा था कि वे नया भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हैं, और प्रधानमंत्री बनने के बाद वे संभवतः अपना पहला दौरा भारत का ही करेंगे। बता दें कि हाल ही में यूके के पीएम बोरिस जॉनसन ने लंदन स्थिति स्वामी नारायण मंदिर का भी दौरा किया था। वे स्वामी नारायण मंदिर में अपनी पार्टनर कैरी सिमोंड के साथ गए थे और उनके साथ गृह सचिव प्रीति पटेल भी थीं।

पर अब लेबर पार्टी का भारत समर्थक स्वभाव उन्हीं के लिए गले की फांस बन चुका है, क्योंकि अब उनका प्रिय वोट बैंक उनसे नाराज़ बैठा है और कभी भी उनसे अपना समर्थन वापिस ले सकता है। अब तो लेबर पार्टी का हाल धोबी के कुत्ते समान हो चुका है, जो ना घर का रहा, और ना ही घाट का।

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