पहले चीन ने ऑस्ट्रेलिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, अब ऑस्ट्रेलिया देगा चीन को 107 बिलियन डॉलर का झटका

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कोरोना ने दुनिया की Geopolitics को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया है। जो कभी दोस्त हुआ करते थे, आज एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ऑस्ट्रेलिया और चीन! कोरोना ने इन दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर सबसे ज़्यादा प्रभाव डाला है। आलम यह है कि चीन ने जहां ऑस्ट्रेलिया पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिये हैं, तो वहीं Australia वैश्विक चीन-विरोधी गुट का नेतृत्व करता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।

कोरोना से पहले चीन और ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक रिश्ते बेहद मजबूत थे। ऑस्ट्रेलिया के कुल एक्स्पोर्ट्स का लगभग 1 तिहाई हिस्सा चीन को ही एक्सपोर्ट होता था। हालांकि, अब चीन ने ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाले बीफ़ पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के barley imports पर भी चीन ने 80 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी लगा दी है। अब इसके बाद ऑस्ट्रेलिया भी चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी में है। ऑस्ट्रेलिया की केंद्र सरकार अब अपने विक्टोरिया राज्य पर दबाव बनाकर चीन के BRI के तहत की गयी 107 बिलियन डॉलर की डील को रद्द कराने की कोशिश में है। अगर यह डील रद्द होती है तो इससे चीन के BRI प्रोजेक्ट को बड़ा झटका पहुंचना तय है।

पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया के दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले विक्टोरिया राज्य ने चीन के साथ यह डील पक्की की थी और तब विक्टोरिया के प्रिमियर डेनियल एंड्रूस ने दावा किया था कि इस प्रोजेक्ट के बाद ऑस्ट्रेलिया में बड़ी संख्या में नौकरियाँ पैदा होंगी और व्यापार बढ़ेगा। डेनियल आज भी BRI प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर अड़े हुए हैं। हालांकि, अब ऑस्ट्रेलिया के अंदर उनका विरोध बढ़ गया है। स्कॉट मॉरिसन के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और इसके साथ ही विक्टोरिया राज्य का विपक्ष लगातार डेनियल पर इस प्रोजेक्ट को रद्द करने का दबाव बना रहे हैं। वैसे भी यह डील legally binding नहीं है, यानि अगर ऑस्ट्रेलिया का विक्टोरिया राज्य इस BRI डील से अपने हाथ वापस खींचता है, तो इसे कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे में डेनियल पर लगातार देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

24 मई को प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने डेनियल को लताड़ लगाते हुए कहा था “विक्टोरिया की BRI डील देश की विदेश नीति में बड़ा रोड़ा बन रही है। राज्यों को देश की विदेश नीति का सम्मान करना चाहिए”। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह कहा था कि डेनियल का यह समझौता देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के राज्यों के पास अपनी खुद की विदेश नीति बनाने का अधिकार होता है। ऑस्ट्रेलिया के राज्य अपने स्तर पर दूसरे देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाते हैं और इसके साथ ही उनके विदेशों में व्यापारिक केंद्र भी खुले होते हैं। उदाहरण के लिए विक्टोरिया राज्य ने शंघाई, टोक्यो, जकार्ता और सिंगापूर जैसे देशों में अपने व्यापार और निवेश ऑफिस खोले हुए हैं। यही कारण है कि पिछले वर्ष विक्टोरिया राज्य ने चीन के साथ BRI डील को पक्का कर लिया था। हालांकि, अब जिस प्रकार केंद्र सरकार और विपक्ष विक्टोरिया के प्रिमियर पर इस डील को रद्द करने का दबाव बना रहे हैं, उसके बाद डेनियल के लिए अब इसके बाद “डिनाइल” मोड में रहना संभव नहीं हो पाएगा और जल्द ही चीन को अपनी 107 बिलियन डील से हाथ धोना पड़ सकता है।