चीन में सब धमकी ही देते हैं. वहां की सेना, वहां का राष्ट्रपति और अब वहां की मीडिया भी

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चीन की निम्नस्तरीय हरकतों से और उनकी जगजाहिर धोखेबाजी के चलते भारत और चीन के बीच लद्दाख में गतिरोध अभी भी जारी है. इस बीच  चीन की सरकारी मीडिया भारत को धमकी देने से बाज नहीं आ रही है. चीन की सरकार के मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लद्दाख में तनाव घटने को सकारात्मक संकेत बताने के साथ-साथ भारत को कई नसीहतें भी दे डाली हैं. चीनी अखबार ने कहा है कि भारत अपनी घरेलू समस्याओं पर ध्यान दे और गुटनिरपेक्षता की अपनी पुरानी नीति पर चले. इसके साथ ही, अमेरिका से दूरी बनाए रखने को लेकर भी भारत को आगाह किया है. कुल मिला कर अब धमकी देने की लिस्ट में उसकी मीडिया भी शामिल हो गई है. 

दरअसल ग्लोबल टाइम्स चीन का सरकारी अख़बार है. तो जाहिर सी बात है जो छपता है चीन की सरकार ही छपवाती है. ऐसे ही इसके एक सरकारी लेख में भारत को धमकी दी गई है कि भारत लद्दाख को लेकर कोई ग़लतफ़हमी न पाले. लद्दाख को डोकलाम समझना भारत की भूल होगी. यद्दपि दुनिया के लिए उसके मीडिया की ये हरकत किसी बड़े मजाक से ज्यादा कुछ भी नहीं है. चीन की सरकार द्वारा लद्दाख की गलवान घाटी में हजारों सैनिकों की तैनाती के साथ सैन्य तनाव की स्थिति बनाने वाला चीन अपने देश की मीडिया की मदद ले रहा है ताकि भारत पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा सके.

इस काम में इस्तेमाल हो रहे ग्लोबल टाइम्स में चीन की सरकार ने भारत को धमकी देने वाले अंदाज़ में कहा है कि डोकलाम में जो हुआ उससे चीन को सीखने को मिला और उसके बाद अब चीन ने अपने सैनिक साजोसामान में टैंक से लेकर ड्रोन तक को शामिल कर लिया है. इसलिए भारत इस गलतफहमी में न रहे कि लद्दाख डोकलाम है. आपको बता दें कि 6 जून को चाइना के बीजिंग में हुए सम्मेलन में चीन की और से जारी बयान में कहा गया था कि चीन भारत के साथ सकारात्मक सहमती तक पहुंच गया है.  इसके अलावा ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने शुक्रवार को प्रकाशित हुए संपादकीय में लिखा गया था कि चीन भारत के लिए बुरा नहीं चाहता है. पिछले दशकों में अच्छे-पड़ोसी संबंध चीन की मूल राष्ट्रीय नीति रही है, और चीन सीमा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का दृढ़ता से पालन करता रहा है. भारत को अपना दुश्मन बनाने का हमारे पास कोई कारण नहीं है.