भारत से उलझकर दहशत में चीन, दुनिया से छिपा रहा अपने सैनिकों की लाशें?

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नई दिल्ली। भारत और चीन (india-china) के बीच गलवान घाटी में के पास चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए, वहीं इस झड़प के दौरान 43 चीनी सैनिकों के भी ढेर होने की खबर है। लेकिन जहां भारतीय सेना (indian army) ने इस झडप पर अपनी स्थिति साफ कर दी है, लेकिन चीन इसे छिपा रहा है। आखिर जब भारत ने अपने शहीद सैनिकों की संख्या को स्पष्ट कर दिया है तो चीन क्यों डरा हुआ है और दुनिया के सामने अपनी स्थिति सही-सही क्यों घोषित नहीे कर पा रहा है। आखिर चीन ऐसा क्यों कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस झडप पर चीन अपनी स्थिति स्पष्ट करने से डर रहा है, ऐसा करने में उसे दोहरी मुश्किल है। पहली, अगर वह झडप में मारे गये सैनिकों की सही स्थिति बताता है तो उसकी कमजोरी दुनिया के सामने आयेगी, साथ उसके अपने देश में भी उसे समस्या उठानी पडेगी। लेकिन अगर चीन इस पर झूठ बोलता है और अपने यहां हुए नुकसान को कम बताता है तो दुनियाभर में विरोध झेल रहे चीन के सामने भारत को भारी समर्थन मिल सकता है, इसके बाद भारत की स्थिति ओर ज्यादा मजबूत हो जायेगी। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह भारत ने झडप में हुए अपने जवानों के नुकसान को दुनिया के सामने साफ कर दिया है, लेकिन चीन ऐसा नहीं कर पा रहा है, ये भी चीन की कमजोरी को ही दर्शा रहा है। भारत से उलझकर चीन अब डर रहा है। एलएसी (LAC) पर उसने हिंसक पहल करके भारतीय सेना को मौका भी दे दिया है।

क्या है चीन का आधिकारिक बयान

चीन की सरकारी मीडिया ने चीनी सेना के हवाले से दावा किया कि गलवान घाटी क्षेत्र पर उसकी ‘हमेशा’ संप्रभुता रही है और आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों ने ‘जानबूझकर उकसाने वाले हमले किए’, जिस कारण ‘गंभीर संघर्ष हुआ और सैनिक हताहत हुए.’

चीन ने क्या आरोप लगाए हैं?

चीन ने आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों ने 15 जून को दो बार अवैध गतिविधियों के लिए सीमा रेखा लांघी और चीन के कर्मियों को उकसाया और उन पर हमले किए जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच गंभीर मारपीट हुई. साथ ही उसने भारतीय सेना के इस बयान का विरोध किया कि गलवान घाटी में तनाव कम करने की प्रक्रिया के दौरान सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई.

भारतीय सैनिकों अवैध गतिविधियों के लिए दो बार सीमा रेखा लांघी- चीन

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिनजियान ने सीमा पर भारतीय सैनिकों के शहीद होने की खबर के बारे में पूछे जाने पर बीजिंग में कहा कि आप जो सूचना दे रहे हैं उसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है. झाओ ने कहा कि हमारे सैनिकों की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी और सीमा पर स्थिति को सामान्य बनाने के बारे में महत्वपूर्ण सहमति बनी थी, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से 15 जून को भारतीय सैनिकों ने हमारी सहमति का गंभीर रूप से उल्लंघन किया और अवैध गतिविधियों के लिए दो बार सीमा रेखा लांघी.

प्रवक्ता ने कहा कि हम एक बार फिर भारतीय पक्ष से कहते हैं कि सहमति का पालन करें. भारत अपनी सेना को कंट्रोल में रखें. अग्रिम मोर्चे के अपने सैनिकों पर कड़ाई से नियंत्रण करें और रेखा नहीं लांघें, समस्या पैदा नहीं करें या एकतरफा कदम नहीं उठाएं, जिससे मामला जटिल बन जाए. झाओ ने कहा कि दोनों पक्ष वार्ता और विचार-विमर्श के माध्यम से मुद्दे के समाधान, स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास पर सहमत हुए और सीमावर्ती क्षेत्र मे शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने पर रजामंदी दी.