कुछ तो होने वाला है! लद्दाख की ओर बढ़ी तीसरी डिवीजन, आसमान में चिंघाड़े लड़ाकू, चीन की छूटी कंपकपी

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नई दिल्ली। गलवान वैली से पहले भारी हलचल है। सीमावर्ती गांवों के लोगों का कहना है कि इस बार कुछ तो होने वाला है। इंडियन आर्मी को इतने आक्रामक रूप में आज से पहले कभी नहीं देखा था। गांवों के बुजुर्ग बताते हैं कि 1962 में जब चीन ने हमला किया था, तब भी भारतीय सेना का इतना विकराल रूप नहीं देखा था। भारत के लड़ाकू विमान चीन के आसमान को चीरने के लिए चिंघाड़ भर रहे हैं और टैंक-तोप दहाड़ रहे हैं। यह देख चीन की कंपकपी छूट रही है। कल तक ग्लोबल टाइम्स के जरिए बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीझियान कह रहे हैं कि डिवीजन कमाण्डर स्तर की वार्ता तुरंत होनी चाहिए। इंडियन आर्मी एग्रेशन पर है। उसे रोकना चाहिए।

एलएसी पर चीन के साथ तनातनी की सूचनाओं के आदी हो चुके लद्दाखियों के लिए इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। संचार नेटवर्क कटे होने के बावजूद एलएसी से सटे दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण शंकाओं के बीच अभी भी अपने माल-मवेशियों के साथ घरों में डटे हुए हैं। लद्दाख के लेह और कारगिल जिलों के अन्य इलाकों के बाशिंदे भी हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। गलवान की घटना के बाद लद्दाख के हालात तेजी से बदल रहे हैं। यहां सेना की मूवमेंट में भारी इजाफा हुआ है। उधर, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के न्योमा, चुशुल और तंगसे निर्वाचन क्षेत्र के दर्जनों गांवों में तनाव है।

गलवान घाटी के अलावा पैंगोंग झील की फिंगर 4 पर भी तनाव है। इसी से सटी मन पैंगोंग पंचायत की मुखिया देछिन महिला सरपंच हैं। इसी तरह से चुशुल की सरपंच सेरिंग डोलकर भी महिला सरपंच हैं। चुशुल के कार्यकारी पार्षद कोनचोक स्टैंजिन ने बताया कि तनाव के दौरान सरपंच अपने गांवों के लोगों का हौसला बढ़ाते हैं। इनमें महिला सरपंच भी शामिल हैं।

चमोली से लगे सीमावर्ती क्षेत्र में भारी संख्या में जवानों की तैनाती कर दी गई है। सेना के वाहनों में खाद्यान्न सामग्री (रसद) भी सीमा क्षेत्र में पहुंचाई जा रही है। आईटीबीपी उत्तरी कमान के उच्चाधिकारी तीन दिन से सीमा क्षेत्र में डटे हैं। सेना और आईटीबीपी के साथ ही खुफिया तंत्र अलर्ट है। लगातार सीमा क्षेत्र की घेराबंदी की जा रही है। चमोली जिले में आसमान में सेना के हेलीकॉप्टर भी काफी दिखे। सेना की ओर से पर्याप्त मात्रा में असलहे और तोपें भी सीमा क्षेत्र में पहुंचाई जा रही हैं।

हिमाचल के किन्नौर से लगती चीन के उस पार चीनी सेना ने तीन-चार टेंट लगा रखा है। भारतीय सेना भी एलएसी पर पूरी तरह से मुस्तैद है। भारत-तिब्बत सीमा के साथ सटे हिंदुस्तान के आखिरी गांव छितकुल में आईटीबीपी ने सुरक्षा के और पुख्ता प्रबंध किए हैं। यहां जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है।

छितकुल गांव के लोगों ने खुद ही आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा लिया है। गांव के लोगों ने करीब एक किलोमीटर दूर बैरियर लगाकर ग्रामीणों की तैनाती भी कर दी है। बैरियर पर तैनात लोगों को वाहनों की तलाशी लेने के निर्देश दिए गए हैं और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले अनजान लोगों को गांव में आने पर मनाही की गई है।

किन्नौर प्रशासन ने ग्रामीणों के सीमावर्ती इलाके में जाने पर रोक लगा दी है। प्रशासन को चीन की सेना की चालबाजी और धोखे का डर है। आसपास के सभी गांवों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अफवाह फैलाने और सूचना देने वालों की छानबीन की जा रही है।