“चीन ने हमारे सैनिकों को पकड़ा, फिर छोड़ दिया”, भ्रम फैलाकर लिबरल मीडिया ने चीन को हीरो बना दिया

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जैसे-जैसे भारत और चीन के बीच एलएसी पर तनाव बढ़ता जा रहा है, चीन भारत को नीचा दिखाने का कोई अवसर हाथ से जाने नहीं दे रहा है। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि इस काम में भारत के वामपंथी मीडिया पोर्टल भी बराबर चीन की सरकार का साथ दे रहे हैं। अभी कल ही कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये सामने आया कि चीन ने कथित तौर पर दस भारतीय सैनिकों को अपनी कस्टडी से रिहा किया है।

द हिन्दू के अनुसार 10 भारतीय सैनिकों को गलवान घाटी में चीन से हुई झड़प में बंदी बना लिया गया था, और मेजर जनरल के लेवल पर बातचीत होने के बाद उन्हें फिर छोड़ा गया। फिर क्या था, एक के बाद एक कई वामपंथी पोर्टल्स ने इसी खबर को बढ़ा-चढ़ाकर प्रकाशित करना शुरू कर दिया। द इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट का शीर्षक कुछ इस प्रकार था“10 सेना के जवानों को पीएलए ने 3 दिन बाद रिहा किया”।

दिलचस्प बात तो यह है कि न तो भारत सरकार ने इन रिपोर्ट्स की पुष्टि की है, और न ही इंडियन आर्मी ने। दोनों ने इन रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए कहा है, “यहाँ हम बता दें कि कोई भी भारतीय सैनिक गायब नहीं है।” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने भी स्पष्ट किया है कि भारतीय सेना का कोई भी जवान इस समय गायब नहीं है।

इन भ्रामक रिपोर्ट्स का फ़ायदा चीनी प्रशासन ने भी बखूबी उठाया है। जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान से पूछा गया कि इस समय भारतीय सैनिकों की क्या स्थिति है, तो झाओ ने कहा “जहां तक मैं जानता हूँ, चीन ने अभी किसी भारतीय सैनिक को हिरासत में नहीं लिया है”। जिस तरह से चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ‘अभी’ शब्द पर ज़ोर दिया है, उससे स्पष्ट पता चलता है कि उनका इशारा किस तरफ है। अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने इस ओर इशारा किया है कि अभी भले ही कोई भारतीय सैनिक उनकी कस्टडी में न हो, पर इससे पहले शायद वो हो सकते थे।

अभी चीन के ऊपर वुहान वायरस की महामारी फैलाने के बाद से दुनिया भर के देशों ने काफी दबाव बनाया हुआ है, और जिस तरह से चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमला किया था, उससे स्पष्ट था कि भारत कूटनीतिक स्तर पर चीन को आड़े हाथों अवश्य लेगा। भारत के मुखर स्वभाव का सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला है, क्योंकि गलवान घाटी के हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूएसए और मालदीव भारतीय सेना के समर्थन में खुलकर सामने आया है।

परंतु जिस तरह से भारत के वामपंथी मीडिया पोर्टल्स ने भारतीय सेना के सैनिकों को लेकर भ्रामक रिपोर्ट्स प्रकाशित की हैं, उसमें कोई दो राय नहीं है कि चीन इसका अनावश्यक फ़ायदा अवश्य उठाएगा, और भारत को कमज़ोर देश के रूप में दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इसीलिए चीनी विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स का खंडन भी नहीं किया है।  भारत के मीडिया पोर्टल्स के इन कृत्यों को देखकर एक ही मुहावरा चरितार्थ होता है, “घर का भेदी लंका ढाये”