“युद्ध हुआ तो भारत चीन को धो डालेगा”, अमेरिका की दो बड़ी studies ने किया दावा

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चीन भारत-तिब्बत बॉर्डर पर लगातार तनाव बढ़ा रहा है, और भारत को युद्ध की धमकी भी दे रहा है। चीन की सरकार से लेकर चीन की मीडिया तक, भारत को निम्न बताने पर तुले हुए हैं। हाल ही में चीन के Global Times ने एक कार्टून के जरिये भारत का मज़ाक उड़ाने की भी कोशिश की थी। लेकिन चीन और भारत के बीच शक्ति संतुलन को लेकर अमेरिका से दो ऐसे शोध सामने आए हैं, जिन्हें देखकर चीन को बड़ा झटका ज़रूर लगेगा। हाल ही में अमेरिका के “Center for a New American Security in Washington” और हार्वर्ड केनेडी स्कूल स्थित ‘बेलफर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स’ की ओर से जारी किए गए शोध में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भारत-चीन के बीच युद्ध की स्थिति में भारत का पलड़ा भारी रहने वाला है।

सबसे पहले बात करते हैं हार्वर्ड केनेडी स्कूल द्वारा जारी शोध की। स्टडी में कहा गया है, ” चीन के सीमावर्ती इलाकों के पास भारत के कुल उपलब्ध स्ट्राइक फोर्स में सैनिकों की संख्या 2,25,000 है। इसकी तुलना में पश्चिमी थिएटर कमांड के तहत और तिब्बत, शिनजियांग मिलिट्री जिलों में चीनी ग्राउंड फोर्स 2,00,00 से 2,30,000 के बीच होने का अनुमान है। भारत के साथ युद्ध के दौरान भी इन बलों का खासा हिस्सा उपलब्ध नहीं होगा, या तो वो रूसी टास्क्स के लिए आरक्षित है या फिर शिनजियांग और तिब्बत में विद्रोह को काउंटर करने के लिए।”

स्टडी में भारतीय वायुसेना के एक पूर्व अधिकारी के हवाले से कहा गया है, “अगर PLAAF (चीनी वायुसेना) सिर्फ तीन हवाई क्षेत्रों पर आक्रमण करता है, तो इसे रनवे और टैक्सी ट्रैक पर हमला करने के लिए हर दिन 660 बैलिस्टिक मिसाइलों की आवश्यकता होगी। इससे सिर्फ तीन एयरफील्ड्स पर हमला करने में महज दो दिन में चीन का 1,000 से 1,200 MRBMs / SRBMs मिसाइलों का स्टॉक खत्म हो जाएगा। ये मध्यम और छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। ये स्थिति तब होगी जब चीन और किसी अहम टारगेट सिस्टम को एड्रेस नहीं करता”।  इसके साथ ही इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि कैसे भारतीय pilots के पास चीनी सेना के pilots के मुक़ाबले ज़्यादा अनुभव होता है, क्योंकि वे लगातार पाकिस्तान के साथ तनाव में रहते हैं।

इस अध्यन्न के अलावा “Center for a New American Security in Washington” के अध्यन्न में भी चीनी सेना की पोल खोली गयी है। इस अध्यन्न में बताया गया है कि कैसे चीनी वायुसेना अपने ऑपरेशन के लिए जमीनी सहायता पर बेहद ज़्यादा आश्रित रहती है, और ऊंचाई होने की वजह से चीनी फाइटर जेट्स सिर्फ आधे पेलोड के साथ ही उड़ान भर सकते हैं, जबकि भारतीय फाइटर जेट्स पूरी क्षमता के अनुसार उड़ान भर सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि भारत के पास दुनिया की सबसे बेहतर पर्वतीय सेना है। चीनी सेना के बारे में इस अध्यन्न में बताया गया है कि उसने वियतनाम युद्ध के बाद किसी बड़े युद्ध में हिस्सा नहीं लिया है, ऐसे में अनुभव के मामले में चीन और पाकिस्तान का कोई जोड़ नहीं है।

अमेरिका की इन दो स्टडीस को चीन को ध्यान से पढ़ने की ज़रूरत है। भारतीय सेना किस हद तक जाकर PLA को नुकसान पहुंचा सकती है, उसका नमूना PLA पहले ही देख चुकी है। ऐसे में अगर PLA भूल कर भी भारतीय सेना के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की सोचती है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।