दक्षिण-चीन सागर में आपका स्वागत है”, चीन की मार झेल रहा फिलीपींस अब आया भारत की शरण में

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भारत-चीन के बीच बढ़ रहे विवाद के दौरान चीन का सताया एक और देश फिलीपींस अब भारत के साथ अपने सैन्य रिश्ते मजबूत करना चाहता है। चीन की गुंडागर्दी सिर्फ लद्दाख तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह दक्षिण चीन सागर में भी वियतनाम और फिलीपींस जैसे छोटे देशों के साथ विवाद को भड़काकर उनके समुद्री इलाकों पर कब्ज़ा करने की फिराक में है। वहीं पिछले कुछ समय में अब भारत भी दक्षिण चीन सागर विवाद में रूचि लेना शुरू कर चुका है। 13 जून की Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक ना सिर्फ भारत फिलीपींस के साथ मिलकर Indo-pacific क्षेत्र में काम करना चाहता है, बल्कि Philippines भी उस विवादित क्षेत्र में भारत की एंट्री चाहता है। इसके अलावा पिछले हफ्ते ही फिलीपींस के नेवी चीफ़ यह पहले ही कह चुके हैं कि वे भारत के साथ सम्बन्धों को बढ़ाना चाहते हैं। इसकी टाइमिंग भी बड़ी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले महीने से भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद चल रहा है।

भारत-चीन के बीच बॉर्डर विवाद में भारत शुरू से ही आक्रामक रहा है। भारत ने लद्दाख में चीन की एक भी नहीं चलने दी है। जिस प्रकार लद्दाख में भारत ने चीन को धूल चटाई है, उसने बेशक चीन की मार झेल रहे दक्षिण चीन सागर से सटे फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों को भारत की ओर आकर्षित किया है। इसके अलावा भारत ने भी Philippines को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले हफ्ते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे (Rodrigo Duterte) से फोन पर बातचीत की थी। इसके अलावा भारत की नेवी ने Philippines की नेवी के प्रति भी बेहद सम्मान-भरा आचरण अपनाया था। दरअसल, भारतीय जल-सीमा में फिलीपींस की नेवी के एक जहाज़ में अचानक आग लग गयी थी, उसके बाद भारत की नेवी ने ना सिर्फ मुफ्त में Philippines की नेवी के जहाज़ को रिपेयर किया, बल्कि उनके दो नेवी अफसरों को भी बेहतर मेडिकल सुविधा प्रदान की। इसके बाद फिलीपींस नेवी चीफ़ ने भारत की प्रशंसा के पुल बांधते हुए भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही थी।

कोरोना के बाद से फिलीपींस और चीन के बीच भी विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी वर्ष अप्रैल में दोनों देशों के बीच विवाद तब बढ़ गया, जब चीन ने Philippines के Fiery Cross reef द्वीप पर अपना दावा ठोक दिया और उसे अपना प्रशासनिक केंद्र बता दिया। फिलीपींस ने इस द्वीप को कई सालों की मेहनत के बाद विकसित किया हुआ है, जिसे चीन हड़पना चाहता है। फिलीपींस ने तब चीन को चेतावनी जारी करते हुए कहा था “चीन को अंतर्राष्ट्रीय नियमों एवं फिलीपींस-चीन के बीच वर्ष 2002 की संधि का सम्मान करना चाहिए और किसी भी उकसावे भरे कदम उठाने से परहेज करना चाहिए”। इसके अलावा दोनों देशों के बीच दक्षिण चीन सागर में विवाद तो शुरू से ही है।

ऐसे में फिलीपींस को एक ऐसे साथी की आवश्यकता है, जो ना सिर्फ indo-pacific क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखता हो, बल्कि वह चीन की हेकड़ी निकालने में भी सक्षम हो। भारत के अलावा इस पूरे क्षेत्र में ऐसा कोई देश नहीं है। यही कारण है कि Philippines अब भारत के साथ सैन्य सम्बन्धों को मजबूत करना चाहता है। अगर भारत और फिलीपींस, दोनों अपनी साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी में बदलते हैं, तो भारत को इस देश में अपने सैन्य ठिकाने विकसित करने का मौका भी मिल सकता है। इस प्रकार भारत को चीन पर एक बड़ी रणनीतिक विजय हासिल हो जाएगी। भारत और Philippines की दोस्ती दोनों देशों के लिए win-win situation का काम करेगी।