पीछे हटने को राज़ी होने के बाद भी चीन ने नहीं छोड़ी अकड़: दिया कड़ा बयान

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नई दिल्ली। एलएसी पर जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चाइनीज स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को अहम बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्ष एलएसी पर सेनाओं को जल्द पीछे हटाने और शांति कायम करने के लिए सहमत हुए हैं। डोवाल और वांग यी दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि हैं, जिनकी मुलाकात 2018 और 2019 में भी हो चुकी है।
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस.जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 17 जून को बातचीत हुई थी। हालांकि 15 जून को गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद यह बातचीत गर्मजोशी के माहौल में नहीं हुई थी। सोमवार को विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि डोवाल और वांग दोनों तरफ से सैनिकों की जल्द वापसी पर सहमत हुए हैं।

एलएसी पर दोनों सेनाओं के पीछे हटने के बाद जहां भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधा हुआ और संतुलित बयान दिया है। वहीं चीनी विदेश मंत्रालय ने गलवान घाटी हिंसा पर कुछ कठोर बातें कही हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत चीन सीमा के पश्चिमी बॉर्डर पर गलवान घाटी में जो हुआ, उसका सही और गलत पूरी तरह से स्पष्ट है। चीन अपनी सीमा और क्षेत्रीय संप्रभुत्ता की रक्षा के साथ ही सीमा पर शांति की आगे भी कोशिश करता रहेगा। हालांकि चीन की तरफ से अब गलवान घाटी पर अपना दावा पेश नहीं किया गया ।
भारत की तरफ से चीन के बयान का खंडन नहीं किया गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष हाल के समय में मिलिट्री और कूटनीतिक स्तर पर हुई बातचीत से जो हासिल हुआ है, उसका स्वागत करते हैं और आगे भी बातचीत जारी रखेंगे। कमांडर लेवल की मीटिंग में जो आम सहमति बनी उसकी अहमियत पर जोर देते हुए फ्रंट लाइन सैनिकों की जल्द वापसी की हरसंभव कोशिश करेंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि दोनों पक्ष आपसी संचार को मजबूत करेंगे और सीमा विवाद पर लगातार बैठकों और चर्चा का दौर जारी रहेगा। विश्वास बहाली की कोशिशें की जाएंगी, ताकि सीमाई इलाकों में और ऐसी (गलवान) घटनाएं ना हों और सीमा पर शांति स्थापित की जा सके।
वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों को चरणबद्ध तरीके से एलएसी से सैनिकों को वापस बुलाना चाहिए। दोनों पक्ष एलएसी का सम्मान करें और उस पर नजर रखें। किसी भी पक्ष को सीमा पर यथास्थिति से छेड़छाड़ की एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए