भारत-चीन विवाद के बीच सशस्त्र बलों को मिला ये विशेष अधिकार

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चीन -भारत विवाद (India- China issue) के चलते रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला किया है जिसके बाद अब सेना को एक बड़ा अधिकार मिल गया है। रक्षा मंत्रालय ने सेना को हथियार खरीदने के विशेषाधिकार को लेकर अहम फैसला लिया है। बुधवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी (DAC) ने सशस्त्र बलों को 300 करोड़ रुपये तक के रक्षा हथियार खरीदने का अधिकार दे दिया है। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की अध्यक्षता में हुई डीएसी के साथ बैठक में यह फैसला लिया गया है कि सेना (Army) को ये 

विशेषाधिकार दिया जाए। 

डीएसी (DAC) के मुताबिक इस फैसले से जब सेना को ये अधिकार मिलेगा तो उनका मनोबल भी बढ़ेगा और हथियारों की खरीद में लगने वाला समय भी बचेगा। इन सबके बाद ही रक्षा मंत्रालय (Difence Ministry) ने बुधवार को ये बड़ा फैसला लेते हुए सेना के तीनों अंगों को ये विशेषाधिकार दिए हैं। अब सेना 300 करोड़ रुपए तक की पूंजीगत खरीद का अधिकार रख पाएगी।

300 करोड़ रुपए तक के हथियार खरीद पाएगी-

हालांकि डीएसी ने अभी खरीद से संबंधित चीजों की संख्या को लेकर कोई भी नियम नहीं बनाये हैं न ही उनकी कोई सीमा तय की है। ये तय किया गया है कि किसी भी आपात आवश्यकता श्रेणी के तहत खरीदी गई रक्षा संबंधी चीज 300 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की नहीं होनी चाहिए। इस फैसले से सशस्त्र बल अपनी आपात अभियानगत जरूरतों को तुरंत पूरा कर पाएगी।

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आपको बता दें कि सीमा से सटे लद्दाख सीमा (Ladakh) पर चीनी सैनिकों के साथ हुए मुठभेड़ के बाद सेना के तीनों अंगों ने पिछले कुछ हफ्तों से अपनी जरूरतों के मुताबिक सैन्य उपकरणों की खरीद शुरु कर दी है।

इस फैसले के जरिए डीएसी सैन्य बलों को मिलने वाले अधिकार उन्हें और भी मजबूत बनाएंगे। बता दें की लद्दाख सीमा पर चीनी सैनिकों से मिलिट्री बिल्डअप की कोशिश की। 

भारतीय सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। भारतीय सीमा में चीन की दखलअंदाजी पर विश्व के अन्य देशों ने उसकी निंदा की। चीन की इस नापाक हरकत पर अमेरिका, फ्रांस समेत कई देशों ने भारत का साथ दिया, जिसके बाद चीन बैकफुट पर पहुंच गया। चीनी सैनिक भले ही एलएसी पर पीछे हट गए हो, लेकिन चीन से इरादे पर अब भरोसा नहीं रह गया है। ऐसे में भारतीय सेना अपनी तैयारी को पूरा रखना चाहती है और इसमें जुटी हुई है।