ये है भारतीय सेना की देसी बोफोर्स, नाम सुनते ही दुश्मन सेना भाग खड़ी होती है

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भारत (india) की सीमाओं से जुड़े दो देश पाकिस्तान (pakistan) और चाइना (china) जो अक्सर भारत को आँख दिखाया करते है, भारत (india) जैसे ही अपनी सीमा पर देसी बोफोर्स को खड़ा करता है इनकी आंखे झुक जाती है। जी हाँ आज हम आपको ऐसी ही एक तोप के बारे में बताने जा रहें हैं जो भारतीय सेना (indian army) के लिए किसी ब्रम्हास्त्र से कम नहीं है। 

भारत देश जब से आजाद हुआ तब से अभी तक हथियार विदेशों से ही खरीदता आया था। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार (narendra modi government) आने के बाद अब इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा दिए गए हैं। बीते कुछ सालों में देश में ही हथियारों के निर्माण में तेजी आई है।इंडियन आर्मी (indian army) में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी (rajiv gandhi) के समय से मौजूद बोफोर्स तोप से भी ज्यादा एडवांस तोप के भारतीय सेना में शामिल होने से सेना की ताकत में इजाफा हुआ है। 

इस तोप के सीमा पर खड़ा करने मात्र से ही दुश्मन सेना के पसीने छूटने लगते हैं। बीते दिनों जब गलवान घाटी (galwan valley) पर चाइना की सेना के साथ भारतीय सेना की झड़प हुयी थी तो उस समय इसी तोप को सीमा पर तैनात किया गया था। इस तोप की ख़ास बात है कि यह पहाड़ी जगहों या किसी चोटी पर भी दुश्मन सेना को टार्गेट करके उसके ठिकाने को बर्बाद कर देती है।
इसलिए ही चालबाज चीन (china) को यह समझ में आ गया था कि अगर उसने अब कोई हिमाकत की तो भारत इस तोप का इस्तेमाल कर उसके सैन्य ठिकानों को तबाह कर देगा। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं धनुष तोप (Dhanush Howitzer) की, जो पूरी तरह से इंडियन है। इस तोप को भारत (make in india) में ही बनाया गया है। और उस तोप की टेक्नोलॉजी भी देसी ही है।

धनुष तोप (Dhanush Howitzer) की खासियत 

‘देसी बोफोर्स’ के नाम से प्रसिद्ध धनुष (Dhanush Howitzer) 155/45 कैलिबर गन प्रणाली से बनी हुयी है। इस तोप के आ जाने के कारण ही भारत की सेना की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है।

धनुष तोप (Dhanush Howitzer) की कार्य प्रणाली सन 1980 में मिली बोफोर्स तोप पर ही आधारित है, लेकिन यह बिल्कुल वैसी नहीं है। 

धनुष तोप (Dhanush Howitzer) बोफोर्स तोप से काफी ज्यादा एडवांस है। 

जी हाँ वही बोफोर्स तोप जिसकी खरीद पर खूब विवाद हुआ था। 

जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी लिया जाता है।

धनुष (Dhanush Howitzer) को मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री में बनाया जाता है। इस तोप को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने डिजाइन और विकसित किया है।

धनुष (Dhanush Howitzer) के सेना में प्रवेश को मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत में निर्मित होने वाली लंबी रेंज की पहली तोप है।

धनुष (Dhanush Howitzer) तोप के बैरल का वजन 2692 किलो है और इसकी लंबाई आठ मीटर है।

धनुष तोप (Dhanush Howitzer) की मारक क्षमता 42-45 किलोमीटर तक है।  

धनुष तोप (Dhanush Howitzer) लगातार दो घंटे तक फायर करने में सक्षम है और यह प्रति मिनट दो फायर करती है।  

इसमें 46.5 किलो का गोला प्रयोग किया जाता है। 

 धनुष के जरिए रात में निशाना लगाया जा सकता है।धनुष तोप (Dhanush Howitzer) को 2017 में ही भारतीय सेना में शामिल किया जाना था। लेकिन कुछ खामियों की वजह से इसमें देरी हुई। धनुष (Dhanush Howitzer) का पहला प्रोटोटाइप 2014 में बना था और इसके बाद कई बार इसके प्रोटोटाइप में बदलाव किये गए।
भारतीय सेना के लिए जबलपुर गन फैक्ट्री कुल 114 धनुष तोपें (Dhanush Howitzer) बनाएगी और अभी सेना के पास दो दर्जन धनुष तोपें है। 2022 तक सभी 114 तोपें तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।    

बोफोर्स तोप की मारक क्षमता जहां 29 किलोमीटर है, वहीं धनुष (Dhanush Howitzer) इससे कहीं अधिक दूरी तक मार करती है। 

बोफोर्स तोप (Dhanush Howitzer) में जो ऑपरेशन सिस्टम है वो ऑटोमेटिक नहीं हैं, जबकि धनुष तोप में एक कंप्यूटर है और यह ऑटोमेटिक है। इसका मतलब यह है कि धनुष तोप (Dhanush Howitzer) खुद ही गोला लोड करके उसे दाग भी सकती है। लगातार कई घंटों तक फायरिंग के बाद भी धनुष तोप का बैरल गरम नहीं होता। धनुष तोप का वजन 13 टन है और एक तोप की कीमत करीब 13 करोड़ रुपये है।