जिद पर अडे काजीः ‘नमाज घर पर कर ली थी, बकरीद पर कुर्बानी तो हर हाल में करेंगे’

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कानपुर। मुस्लिमों के प्रमुख त्योहारों में से एक ईद-उल-जुहा की रौनक भी कोरोना वायरस के चलते फीकी रहने वाली है। कोरोना संकट के बीच कैसे बकरीद का त्योहार मनाया जाए, बकरीद पर कुर्बानियां होंगी या नहीं इसको लेकर पूरे समाज में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस बीच शहर काजी आलम रजा नूरी इस बात की जिद पर अड़े हैं बकरीद के मौके पर कुर्बानी हर हाल में होकर रहेगी। उनका कहना है कि ईद, नमाज, तराहवी हमने घर पर कर ली। मगर बकरीद में हमें छूट मिलनी चाहिए।

शहर काजी आलम रजा नूरी के मुताबिक बकरीद बिल्कुल नजदीक है, 21 या 22 तारीख को चांद नजर आएगा। 31 जुलाई या फिर 1 अगस्त को बकरीद होगी। जाहिर सी बात है कि हमारे मुस्लिम समाज में इस बात को लेकर चर्चा है कि कुर्बानी होगी या नहीं होगी, जानवरों की मार्केट लगेगी कि नहीं। शहर काजी ने कहा कि कुर्बानी तो हर हाल में होगी, इसलिए कि हर चीज का एक बदल था और हम उसको बदलते रहे। नमाज और तराहवी, रमजान सारी चीजों को हम घरों में रहकर करते रहे। कुर्बानी तो एक ऐसी चीज है कि उसे तो हर हाल में करना है।

पूरी उम्मीद है कि सरकार कुर्बानी की छूट देगी

उन्होंने कहा, हमें पूरी उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार कुर्बानी करने के लिए जरूर छूट देगी। कुर्बानी तो होगी ही, लेकिन एक सवाल पैदा होता है कि क्या बकरों की बाजार लगेगी, इसे लेकर भी लोग भ्रम की स्थिति में हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन से बात होगी।

लाॅकडाउन में मिले भेड़-बकरों की बाजार लगने की छूट

काजी ने मांग की है कि जिस तरीके से बाकी बाजार लगाए जा रहे हैं, वैसे ही भेड़-बकरों की बाजार भी लगाई जाए। ताकि कुर्बानी करने वालों को कोई परेशानी न हो। दरअसल तीन दिनों तक बकरीद का सिलसिला चलता है और कुर्बानियों का सिलसिला भी चलता है। बकरीद के तीन दिन लाॅकडाउन में ही आ रहे हैं। हमारी मांग है कि इस टाइम में लाॅकडाउन में छूट दी जाए और हम जानवरों की कुर्बानियां पेश कर सकें। हमें कोई परेशानी न हो