“पहले चीन बर्बाद होगा फिर CCP को जड़ से उखाड़ देंगे”, US मिलिट्री को अब बस ट्रम्प के आदेशों का इंतज़ार है

ट्रेंडिंग

विश्व भले ही अभी वुहान वायरस की महामारी से जूझ रहा हो, परंतु डोनाल्ड ट्रम्प चीन को किसी भी स्थिति में माफ करने के मूड में नहीं है। अब सूत्रों के अनुसार ये जानकारी मिली है कि चीन के विरुद्ध डोनाल्ड ट्रम्प युद्धस्तर की तैयारी कर रहे हैं, जो संभवत एक विशुद्ध युद्ध का भी रूप ले सकती है।

अमेरिका के रणनीतिक विशेषज्ञों में शुमार स्टीव बैनन ने अभी हाल ही में खुलासा किया है कि डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी सरकार ने चीन के विरुद्ध निर्णायक युद्ध छेड़ने की तैयारी कर ली है। वुहान वायरस से अमेरिका की फलती फूलती अर्थव्यवस्था और जनमानस को कितना नुकसान पहुंचा है, ये किसी से छुपा नहीं है। फॉक्स न्यूज़ को दिये साक्षात्कार में उन्होंने बताया, “अब आप कुछ ही समय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विध्वंस को अपनी आँखों से देख पाएंगे, जिसके लिए डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। यह निर्णायक कार्रवाई युद्ध का भी रूप ले सकती है”।

लेकिन इस निर्णायक कार्रवाई को परिणाम तक कैसे लाया जाएगा? इसके बारे में बताते हुए स्टीव बताते हैं, “राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, एफ़बीआई निदेशक और एटॉर्नी जनरल के साथ एकजुट हो राष्ट्रपति चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को चारों तरफ से पहले घेरेंगे, फिर उसकी नीतियों पर करारा प्रहार करेंगे, और फिर अनेकों मोर्चों पर चीन के प्रोपगैंडा को ध्वस्त करने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। यदि युद्ध की आवश्यकता पड़ी, तो ट्रम्प प्रशासन युद्ध से भी पीछे नहीं हटेगा”।

सच कहें तो अमेरिका पहले ही चीन की हवा टाइट करने का प्रबंध कर चुका है। अमेरिका के टेलिकॉम निरीक्षकों ने चीनी टेलिकॉम कंपनी Huawei aur ZTE जैसे कंपनियों को राष्ट्र के लिए खतरा घोषित किया है, तो वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अनेकों विधेयकों को अपनी स्वीकृति दी है, जिसके अंतर्गत चीन के कब्जे में स्थित तिब्बत, हाँग काँग और ताइवान की स्वायत्ता को भी आधिकारिक रूप से स्वीकारा गया है। पर बात वहीं पर खत्म नहीं हो जाती, क्योंकि अमेरिका ने उन सीसीपी अफसरों के विरुद्ध भी कार्रवाई करने का मार्ग प्रशस्त किया है, जिन्हें शिंजियांग, तिब्बत या फिर हाँग काँग में मानवाधिकार उल्लंघन का दोषी पाया गया हो।

इसके अलावा चीन की शान माने जाने वाली Huawei को भी अमेरिका ने वैश्विक बाज़ार से धक्के मारकर बाहर निकालने का प्रबंध किया है। जहां यूके, जापान सहित विश्व के बड़े बड़े देश Huawei को स्वीकारने से कतरा रहे हैं, तो वहीं उन कंपनियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो तकनीक के मामले में हर सुविधा से परिपूर्ण है, और जिनमें किसी प्रकार की मिलावट [चीनी उपकरणों का प्रयोग] नहीं है। उदाहरण के लिए 5G में Huawei के असरदार विकल्प के रूप में उभर रहे जापान के Rakuten और भारत के रिलायंस जियो को पहले ही अमेरिका ने ‘क्लीन टेक्नोलॉजी’का दर्जा दिया है, यानि वो तकनीक जो पूर्ण रूप से स्वदेशी हो, और कोई चीनी उपकरण का प्रयोग न हुआ हो।

परंतु स्टीव बैनन ने अपने साक्षात्कार में एक और बात कही, जिस पर शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा। स्टीव ने कहा, “अपने साथियों के साथ हम न केवल दक्षिण चीन सागर को चीन के प्रभाव से मुक्त रखने का प्रयास करेंगे, अपितु चीन द्वारा भारत के साथ की जा रही ज्यादती के विरुद्ध भी मोर्चा संभाला जाएगा, और भारत को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी”।

यह बयान इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका के लिए भारत अब वही भूमिका निभा रहा है, जो विश्व युद्ध द्वितीय में नाजी जर्मनी के विरोधी देशों के लिए अमेरिका ने स्वयं किया था, अर्थात अमेरिका की कोई भी योजना बिना भारत के भाग लिए अधूरी मानी जाएगी। जिस तरह से भारत ने चीन को खुलेआम चुनौती देते हुए गलवान घाटी पर किए गए हमले के उपलक्ष्य में कई ताबड़तोड़ निर्णय लिए, उससे अमेरिका भी काफी प्रभावित हुआ है, और उसने भारत को हरसंभव सहायता देने का वादा भी किया है।

गलवान घाटी पर हमले के तुरंत बाद ही अमेरिका ने न केवल आधिकारिक रूप से हुतात्मा हुए भारतीय सैनिकों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की, अपितु भारत को सैन्य सहायता प्रदान करने का भी आश्वासन दिया। ऐसे में अब चीन के दिन लद चुके हैं, और अब देखना यह होगा कि वह कितने दिनों तक अपनी हेकड़ी और अपने छल कपट के सहारे दुनिया को धोखा देता रहेगा।