“बर्बादी आने वाली है, तैयार रहो”, चीन के सरकारी bank regulator ने जारी की चेतावनी

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पिछले शुक्रवार को चीनी सरकार ने चीन की 9 वित्तीय कंपनियों को अपने कब्जे में ले लिया था। इन 9 कंपनियों में 4 बीमा कंपनी थी, 3 security firms थीं और 2 trust firms थीं। चीनी सरकार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि ये सभी कंपनियां बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी थीं। Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन सब कंपनियों की कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन युआन करीब 143 बिलियन डॉलर की थी, और इन कंपनियों के विफल होने से चीनी बाज़ार में भूचाल आ सकता था।

चीन के banking और insurance सेक्टर को regulate करने वाली चीन की banking and Insurance Regulatory Commission ने कोरोना के कारण और दुनियाभर में चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगने की वजह से bad loans में तेजी से उछाल आने को लेकर चीनी सरकार को आगाह किया है। चीन की सरकार अब बेशक अपने आंकड़ों में छेड़छाड़ कर अपनी अर्थव्यवस्था को बिलकुल नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रही हो, लेकिन सच तो यह है कि चीनी अर्थव्यवस्था अब जमीनी स्तर पर कमजोर होना शुरू हो गयी है, और इसका बड़ा कारण है पिछले एक दशक में बैंकों द्वारा धड़ल्ले से बड़े-बड़े लोन दिये जाना।

चीन के आधिकरिक regulator ने हाल ही में सरकार को चेतावनी देने हुए कहा था “shadow banking की राख़ को हमें दोबारा जलने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे, और यह करते वक्त हमें real estate की financing में भी कोई समस्या खड़ी नहीं करनी है। साथ ही साथ सरकार को बाहरी वातावरण (व्यापार संबंधी) में बड़े बदलाव के लिए भी अपने आप को तैयार करना होगा”।

दुनियाभर में चीनी उत्पादों के बहिष्कार और आर्थिक गिरावट के बीच चीनी बैंकों को सबसे बड़ा झटका लगा है। पिछले दो हफ्तों में चीन के दो प्रान्तों यानि हुबई और शांकसी के बड़े बैंक अपने कस्टमर्स को उनका deposit देने में असफल रहे हैं, और इन बैंकों के सामने कस्टमर्स की बड़ी लाइनें भी देखने को मिली थी।

चीन के क्षेत्रीय बैंकों के NPAs यानि Non-Performing Assets पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से बढ़े हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि चीन के real estate सेक्टर में चीनी सरकार द्वारा भरी गयी हवा जल्द ही निकल गयी और आज कई कंपनियाँ लोन को चुकाने में सक्षम नहीं हैं।

कोरोना के बाद से चीन के banking सिस्टम पर लोगों का विश्वास खत्म हुआ है, जिसके बाद चीन के कई बिजनेस लगातार बंद हो रहे हैं। इसी के साथ-साथ भारत और अमेरिका जैसे बड़े चीनी बाज़ारों में चीन के सामान के बहिष्कार ने चीन के लिए समस्या और बढ़ा दी है। लद्दाख में चीन की गुंडई और दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का खामियाजा एक्सपोर्ट पर निर्भर होने वाली चीनी कंपनियों को उठाना पड़ रहा है।

हाल ही में चीन में सोना घोटाला भी सामने आया है जहां एक CCP सदस्य की कंपनी को 16 बिलियन युआन के फर्जीवाड़े में रंगे हाथों पकड़ा गया था। दरअसल, पिछले कुछ सालों में चीन के हुबई प्रांत की सबसे बड़ी प्राइवेट ज्यूलरी कंपनी Kingold ने अपने 83 टन “सोने” को अलग-अलग ऋणदाताओं के पास गिरवी रख करीब 16 बिलियन युआन का कर्ज़ उठाया था। अब हाल ही में जांच होने के बाद यह सामने आया था कि वह 83 टन सोना असल में सोना था ही नहीं, बल्कि वह कॉपर था जिसपर सोने की परत चढ़ाई गयी थी। यह सोना घोटाला हाल ही के इतिहास का सबसे बड़ा सोना घोटाला बताया जा रहा है, क्योंकि 83 टन सोना चीन के सालाना सोने उत्पादन के 22 प्रतिशत हिस्से के बराबर है। इसके अलावा 83 टन सोना चीन के कुल Gold Reserve के 4 प्रतिशत हिस्से के बराबर है।

क्षेत्रीय बैंक तो छोड़िए, अब चीन की 3 ट्रिलियन डॉलर की इंडस्ट्री चलाने वाले चीन के shadow banks पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। कुछ ही हफ्तों पहले चीन के सबसे बड़े shadow banks में से एक Sichuan Trust ने अपने उपभोक्ताओं को पेमेंट में देरी के कारण उनसे माफी मांगी थी। कोरोना और वैश्विक आर्थिक मंदी चीन को बर्बाद की मुहाने पर ला आई है। यह फिर इस बात को प्रमाणित करता है कि चीन का lehman brothers moment नजदीक आ गया है जिसके बाद हमें चीनी अर्थव्यवस्था की असल सूरत देखने को मिल सकती है।