आखिर क्यों यहीं 5 पायलट चुनें गयें राफेल के लिये..जानियें इनकी खासियत👇👇

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भारतीय वायुसेना की शक्ति में बढ़ोतरी हुई है. फ्रांस से उड़ान भरने के बाद पांच राफेल लड़ाकू विमान भारतीय जमीन में पहुंच गए हैं. हरियाणा के अंबाला एयरबेस में बुधवार को राफेल विमान लैंड हुए, जहां उनका स्वागत वॉटर सैल्यूट के साथ किया गया. इन राफेल विमानों को उड़ाने के लिए बेहद अनुभवी पायलटों को चुना गया था. टीम का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह को मिली. उनकी टीम में दक्षिण कश्मीर से एयर कमोडोर हिलाल अहमद राथर, यूपी के बलिया से कोमोडोर मनीष सिंह, राजस्थान के जालोर से विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी भी शामिल थे.
जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हिलाल अहमद राथर की गिनती देश के बेहतरीन पयलटों में होती है. हिलाल की पढ़ाई जम्मू जिले के नगरोटा कस्बे में सैनिक स्कूल में हुई. वो वायुसेना में 17 दिसंबर, 1988 को एक लड़ाकू पायलट के रूप में शामिल हुए. 1993 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए, 2004 में विंग कमांडर, 2016 में ग्रुप कैप्टन और 2019 में एयर कोमोडोर बने. मिराज-2000, मिग-21 और किरण एयरक्राफ्ट पर उड़ान के दौरान हिलाल ने अब तक तकरीबन 3000 घंटे गुजारे हैं.
बातचीत में (रि) विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने और भी कई अहम बातें बताई. पायलटों के टीम लीडर की बात करें तो उन्हें वायुसेना में 21 साल का अनुभव है. उनकी ट्रेनिंग के बाद ही उन्हें चुना गया. ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरो’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं. हरकीरत सिंह पहले मिग-21 के पायलट थे. एक बार उन्होंने बाइसन में उड़ान भरी थी. करीब 4 किमी की ऊंचाई पर अवरोध प्रक्रिया के दौरान उनके जहाज के इंजन में आग लगी और तीन धमाके हुए. बावजूद इसके हरकीरत सिंह ने तुरंत आग पर काबू पाया जहाज को सुरक्षित लैंड करा लिया.