अब काशी की बारी – काशी की मुक्ति के लिए टीम गठित, डॉ स्वामी ने शुरू किया अभियान

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जब शिवाजी महाराज का निधन हो रहा था तो उन्होंने अपने अंतिम समय में ये बात कही थी की हमे अपने सभी धार्मिक स्थलों को आतंकवादियों से मुक्त करवाना हैअयोध्या को मुक्ति मिल गयी पर आज भी हमारे हजारों धार्मिक स्थल मुक्त करवाए जाने बाकी है, अयोध्या आन्दोलन के समय कारसेवकों ने नारा भी दिया था, अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा और 40000 से ज्यादा मंदिर अभी बाकी है अयोध्या को मुक्ति मिल गयी और अब इसके बाद काशी की बारी हैकाशी में भगवान् विश्वनाथ का शिवलिंग था, हिन्दू आस्था का ये केंद्र था, भव्य मंदिर था जिसे इस्लामिक आतंकवादियों ने तोड़ दिया और उसपर ज्ञानव्यापी मस्जिद बना दी, आप इस ज्ञानव्यापी मस्जिद को देखिये जो की काशी की धरती पर बना हुआ है



आज भी इसकी दीवार चींख चींख कर बता रही है की ये एक हिन्दू मंदिर है, आतंकवादियों ने मंदिर को तो तोड़ दिया पर उसकी सभी दीवारों को नहीं तोड़ सके और उसी पर मस्जिद बना दी ये आतंकवाद की निशानी ही है जिसके सभी सबूत मौजूद है, अयोध्या का मामला तो कठिन था पर काशी और मथुरा का मामला उतना कठिन नहीं, इन दोनों के ढेरों सबूत मौजूद हैकाशी की मुक्ति के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने अभियान शुरू कर दिया है, अखिल भारतीय संत समिति ने काशी को लेकर अपनी योजना को तैयार करना शुरू कर दिया है और श्री काशी ज्ञानव्यापी मुक्ति यग्य समिति बनाई जा चुकी है 

इस समिति की एक बैठक मथुरा में हो भी चुकी है, जिसपर काशी और मथुरा दोनों पर चर्चा हुई है, स्वामी जीतेंद्रनंद सरस्वती जो की महासचिव है उन्होंने कहा है की अयोध्या की तरह काशी और मथुरा की मुक्ति के लिए भी कार्य शुरू किया जायेगा, समिति ने कहा है की 1669 में औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर तुडवा दिया था और उस स्थान पर मस्जिद बनाई थी, इस स्थान की मुक्ति होनी चाहिए और यहाँ पर वापस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की जानी चाहिए