इधर PM Modi ने राम मंदिर की नींव रखी, उधर राजस्थान में 50 मुस्लिम परिवारों ने सनातन को गले लगा लिया

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भारत के इतिहास में कल यानि पांच अगस्त की तिथि दीर्घकाल के लिए स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया जब 500 वर्षों की लड़ाई के बाद अयोध्या में राम जन्मभूमि का भूमि पूजन हुआ। देश की जनता में एक अलग प्रकार का हर्षोल्लास था और लोगों ने दीप जलाकर खुशियाँ मनाई। राजस्थान में यह यह मौका और भी बड़ा हो गया जब बाड़मेर जिले के पायला कल्ला पंचायत समिति के मोतीसरा गांव में रहने वाले 50 मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म अपना कर घर वापसी की। आखिर राम मंदिर की भूमि पूजन की तिथि से पावन अवसर शायद ही मिले किसी को।

रिपोर्ट के अनुसार बाड़मेर जिले के पायला कल्ला पंचायत समिति के मोतीसरा गांव के इन परिवारों के करीब 250 लोगों ने राम मंदिर के भूमि पूजन के अवसर पर हवन-पूजन कर वापस हिन्दू घर्म अपनाया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इन परिवारों ने श्री राम और हनुमान जी की तस्वीर के समक्ष पूजा-अर्चना की। यही नहीं इन परिवार के पुरुषों ने जनेऊ धारण कर पुजा अर्चना की।

रिपोर्ट के अनुसार हिन्दू धर्म अपनाने वाले परिवारों के बड़े बुजुर्गों ने बताया कि उनके पूर्वज हिन्दू ही थे लेकिन मुगल काल के दौरान इन सभी परिवारों को डरा-धमका कर धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया था।

इन परिवारों का कहना है कि वे शुरू से ही हिंदू धर्म के कई त्योहार मनाते रहे हैं।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार हिन्‍दू धर्म अपनाने वाले सुभनराम ने बताया कि, “मुगल काल में मुस्लिमों ने हमारे पूर्वजों को डरा धमकाकर मुस्लिम बनाया था, लेकिन हम हिंदू धर्म से ताल्लुक रखते थे सीमावर्ती जिले के मुसलमान हम लोगों से दूरी रखते हैं।“

सुभनराम  ने बताया कि इतिहास की जानकारी होने के बाद उन्होंने इस चीज के ऊपर ध्यान दिया कि वे हिंदू हैं और उन्हें वापस हिंदू धर्म में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, “हमारे रीति रिवाज पूरे हिंदू धर्म से संबंध रखते हैं। इसी के बाद पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में वापसी की इच्छा जताई। फिर घर पर हवन यज्ञ करवाकर जनेऊ पहनकर परिवार के सभी 250 सदस्यों ने फिर से हिंदू धर्म में वापसी कर ली है।”

गांव के हरजीराम के मुताबिक कंचन ढाढ़ी जाति से ताल्लुक रखने वाला यह पूरा परिवार पिछले कई वर्षों से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहा था। ये हर वर्ष अपने घरों में हिंदू त्‍योहारों को ही मनाते हैं। गांव के ही विंजाराम ने बताया कि हम ईद पर केवल औपचारिकता निभाते थे, लेकिन दीपावली का त्योहार काफी उत्साह से मनाते रहे हैं। राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के शिलान्यास के समारोह पर हम सभी ने गांव के सरपंच को बताकर हवन पूजा पाठ का कार्यक्रम रखा और हिंदू संस्कृति का पालन करते हुए हमने अपनी स्वेच्छा से घर वापसी की है। वहीं हरुराम ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास पर हमें बहुत खुशी हुई और हमने अपने घरों में दीपक जलाए।

बता दें कि औरंगजेब के शासन में पूरे भारत में हिंदुओं के लाखो मंदिरों को तोड़ा गया थआ और लोगों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। उस दौरान मुस्लिम धर्म न अपनाने पर कई तरह की यातनाएं दी जाती थीं।

वैसे ये पहली बार नहीं जब पश्चिमी राज्यों के लोगों ने हिन्दू धर्म में वापसी की है। इससे पहले इसी वर्ष मई के महीने में हरियाणा के हिसार जिले के बिथमारा गांव के 40 परिवार के लगभग 250 सदस्यों ने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया और अपने घर की एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार हिन्दू रीतिरिवाज से किया था। उससे पहले जब कोरोना के दौरान डाक्टरों पर हमला हो रहा था तब भी हरियाणा के ही जिंद जिले के दानोदा कलान गांव के 35 सदस्यों ने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया था। यानि इन मामलों को देख कर यह कहा जा सकता है कि अब देश में ऐसा माहौल बन रहा है जिससे लोगों को अपनी संस्कृति का एहसास हो रहा है और वो हिन्दू धर्म को अपना रहे हैं। भारत और सनातन धर्म की यही विशेषता रही है कि कभी किसी भी व्यक्ति पर किसी जीवन पद्धति अपनाने के किए दबाव नहीं बनाया गया और न ही लालच दिया जाता है। यही भारत और सनातन धर्म की वास्तविकता है और हर भारतीय को इस पर गर्व होना चाहिए।