शास्‍त्रों में बताई गई इन बातों को मानने से कोरोना संक्रमण से रहेंगे कोसों दूर

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कोरोना से संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इससे संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में बढ़कर 1,436,833 हो गई है. दुनिया में कोरोना वायरस ने 82,421 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. ये जानलेवा वायरस पूरी दुनिया पर कब्ज़ा कर चुका हैं. आपको पता ही हैं शास्त्रों में हर बात का सामाधान दिया हैं. इस वायरस से बचाव के बारे में भी शास्त्रों में बताया गया हैं.

हाथ से परोसा गया खाना: धर्मंसिंधु पुराण में इस बारे में बताया गया है कि नमक, घी, तेल या फिर कोई अन्‍य व्‍यंजन, पेय पदार्थ या फिर खाने का कोई भी सामान यदि बिना चम्‍मच के हाथ से परोसा गया हो तो वह खाने योग्‍य नहीं रह जाता है। इसलिए कहा जाता है कि खाना परोसते समय चम्‍मच का प्रयोग जरूर करें. ऐसे वस्‍त्र न पहनें:विष्‍णुस्‍मृति में बताया गया है कि व्‍यक्ति को एक बार पहना गया कपड़ा धोए बिना फिर से धारण नहीं करना चाहिए। कपड़ा एक बार पहनने पर वह वातावरण में मौजूद जीवाणु और विषाणु के संपर्क में आ जाता है और दोबारा बिना धोए पहनने लायक नहीं रह जाता है।

मुंह और सिर को ढककर ही करें यह कार्य: वाधूलस्मृति और मनुस्मृति में बताया गया है कि हमें हमेशा ही नाक, मुंह तथा सिर को ढ़ककर, मौन रहकर मल मूत्र का त्याग करना चाहिए। ऐसा करने पर हमारे ऊपर संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।भींगे कपड़ों से न पोंछें शरीर:मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है कि स्‍नान करने के बाद जरा भी गीले कपड़ों से तन को नहीं पोंछना चाहिए। ऐसा करने से त्‍वचा के संक्रमण की आशंका बनी रहती है। अर्थात् किसी सूखे कपड़े (तौलिए) से ही पोंछना चाहिए।

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