चलती हुई केबिनेट बैठक से उठकर चले गये योगी आदित्यनाथ, जानिये क्या था मामला

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योगी आदित्यनाथ चाहे आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है और सांसद भी रह चुके है लेकिन इसके बावजूद कभी भी उन पर ये आरोप नही लग सका है कि निजी तौर पर उन्होंने खुदके फायदे के लिए कोई काम किया हो. इस वजह से वो कई लोगो के चहेते भी है और एक बार फिर से उन्होंने इसका प्रदर्शन अपनी केबिनेट की मीटिंग के दौरान किया जो अपने आप में हर किसी को न सिर्फ पसंद आया बल्कि इसकी सोशल मीडिया पर भी अच्छी खासी चर्चा देखने में आ रही है.

यूपी केबिनेट में आया गोरक्षनाथ चिकित्सालय से सम्बंधित प्रस्ताव, पीठाधीश्वर होने के नाते फैसले में शामिल नही हुए
उत्तर प्रदेश की केबिनेट की मीटिंग चल रही थी और उसी मीटिंग के दौरान एक प्रस्ताव ऐसा आया जो गोरक्षनाथ चिकित्सालय से जुडा हुआ था. इसमें उसे फायदा होने वाला था और क्योंकि योगी आदित्यनाथ इसी के मंदिर के पीठाधीश्वर थे तो वो लीगली भी और मोरली भी इससे जुडा हुआ फैसला नही कर सकते थे. आखिर खुद मुख्यमंत्री होते हुए खुदके मठ से जुडा हुआ फैसला कैसे कर लेते?

इसी कारण से योगी आदित्यनाथ केबिनेट की मीटिंग छोड़कर के बाहर चले गये जिसके बाद में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कुर्सी सम्भाली और उन्होंने चिकित्सालय से जुड़ा हुआ फैसला किया और मीटिंग का काम पूरा हुआ. इसके बाद में अब जाकर के कही न कही सारा का सारा काम पूरा हुआ है. योगी आदित्यनाथ ने यहाँ पर कर्तव्य को निभाया है चाहे वो मठ से जुडा हुआ हो या फिर सीएम पद से जुड़ा हुआ हो.

वही अगर दूसरी तरफ देखे तो मनमोहन सिंह और कांग्रेस ने अपने पार्टी से जुड़े हुए एनजीओ को लेकर के कई फायदा पहुंचाने वाले फैसले लिए थे. ऐसे फैसले लोग अपने फायदों के लिए लोग अपने पदों का खूब उपयोग करते हुए देखे जाते रहे है लेकिन योगी आदित्यनाथ इन मामलो में अलग रहते है.