युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों पर कहर बनकर टूटी थी बोफोर्स तोप, जानें इनकी खासियत

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Kargil War: स्वीडन की बनी यह तोप सेना के बेहद काम आई थी। बोफोर्स तोपों (Bofors Tanks) ने तोलोलिंग की चोटी के साथ ही द्रास सेक्टर की हर चोटी में छिपे दुश्मन पर निशाना लगाया था।

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के पास एक से बढ़कर एक आधुनिक हथियार थे। सेना ने इन हथियारों के दम पर ही पाकिस्तानी सैनिकों को धूल चटाई थी। युद्ध में पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा था। इस युद्ध में सेना के शौर्य की बात हो, तो बोफोर्स तोपों (Bofors Tanks) का जिक्र भी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह तोप पूरे युद्ध के दौरान सेना के लिए ढाल बनी थी और दुश्मनों पर कहर बनकर टूटी थी।

ये थी इस तोप की अहमियत: पाकिस्तान कारगिल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर कब्जा जमा कर बैठा था। भारतीय सेना चढ़ाई करते हुए दुश्मन तक पहुंच रही थी। ऐसे में बंकरों तक रायफल से गोली का पहुंचना संभव नहीं था।

जिन जवानों ने बंकरों तक पहुंचने में सफलता पाई, वे दुश्मनों पर कहर बनकर टूट पड़ते थे। दुश्मन कब्जा जमाए बैठे थे और लगातार बमबारी  कर रहे थे और गोलियां चला रहे थे। चोटी पर चढ़कर दुश्मन के ठिकानों को बरबाद करना ही सेना का पहला लक्ष्य था।

कारगिल की लड़ाई (Kargil War) दुनिया की सबसे ऊंचाई पर लड़ा गया युद्ध था। युद्ध करीब 40 दिन चला लेकिन जैसा हर युद्ध में देखने को मिलता है, दोनों देशों को इसका नुकसान झेलना पड़ा। पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ था।

सेना ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बोफोर्स तोप का इस्तेमाल किया था। स्वीडन की बनी यह तोप सेना के बेहद काम आई थी। बोफोर्स तोपों (Bofors Tanks) ने तोलोलिंग की चोटी के साथ ही द्रास सेक्टर की हर चोटी में छिपे दुश्मन पर निशाना लगाया था।

ये है इस तोप की खासियत: बोफोर्स तोप मर्सिडीज के इंजन से लैस है। इस इंजन की खासियत यह है कि यह 68  हॉर्स पावर से लैस है। इसमें एक नहीं बल्कि दो इंजन लगे हैं। इस वजह से इसकी मारक क्षमता बेहद ही शानदार है। दोनों इंजन की फ्यूल क्षमता 22 लीटर की है।

इस तोप के जरिए महज 14 सेकेंड्स के भीतर ही तीन राउंड फायर किया जा सकता है। साइज में छोटी होने के कारण इसे पहाड़ों पर एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है।