कोरोना से लड़ने के लिए एम्स ने तैयार किया ‘प्लान B’, जानकर दंग रह जायेंगें

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दुनियाभर में इन दिनों कोरोना वायरस ने तबाही मचा रखी है। लोगों में इस महामारी का ख़ौफ़ बना हुआ है। पूरी दुनिया के लोग कोरोना वायरस से बचने की कोशिश कर रही है। बात करें पूरी दुनिया की तो अभी तक कोरोना वायरस से 12 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. भारत में इस महामारी से १२ लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना महामारी से निपटने के लिए पूरे भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है. आम लोगों के साथ फ़िल्म औत टीवी इंडस्ट्री भी इस वायरस से बचने के लिए कई तरीक़े अपना रहे हैं.

एम्स में भले ही अभी तक कोरोना के मरीजों का इलाज शुरू नहीं किया गया हो, लेकिन यहां पर बड़े स्तर पर बैकअप प्लान की तैयारी चल रही है। न केवल मरीजों का इलाज, बल्कि इलाज करने वाले डॉक्टर, नर्स और स्टाफ के सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए प्लान बनाया जा रहा है। एम्स में कोरोना के इलाज में डॉक्टरों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर होगी। एम्स ने इसके लिए रेजिडेंट डॉक्‍टरों की दो टीमें तैयार की हैं। पहली टीम अगले 4 हफ्ते तक ड्यूटी पर तैनात रहेगी। इसके बाद दसूरी टीम ड्यूटी पर आएगी। एम्स ने अपनी पूरी योजना डॉक्टरों के हितों को देखते हुए बनाई है। चूंकि कोरोना के इलाज के दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों को भी संक्रमण होने का खतरा है। ऐसे में एम्स प्रशासन ने पूरी सावधानी के साथ काम करने की योजना बनाई है, ताकि अगर किसी डॉक्टर को संक्रमण हुआ तो उनके संपर्क में आए कई डॉक्टरों को भी क्वारंटीन करना पड़ सकता है। इसलिए इसका असर इलाज पर होने के साथ-साथ अस्पताल को भी बंद करने की स्थिति भी बन सकती है। इसलिट एम्स ने टीम बनाकर रोटेशन पर ड्यूटी तय की है, ताकि दूसरी टीम हमेशा सुरक्षित और तैयार रहे। एम्स प्रशासन ने इसके लिए पूरा खाका तैयार किया है और उसके आधार पर यह टीम बनाई है

एम्स प्रशासन की तरफ से यह आदेश की कॉपी सभी रेजिडेंट डॉक्टरों को भेज दी गई है। आदेश में कहा गया है कि अगले चार हफ्ते तक इंस्टिट्यूट के 25 पर्सेंट डॉक्टर कोरोना टीम का हिस्सा होंगे। इसमें करीब सभी विभागों के रेजिडेंट डॉक्टरों को शामिल किया गया है। एम्स ने अपने आदेश में कहा है कि इस टीम में शामिल रेजिडेंट डॉक्टरों को अपने विभाग में रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है। इस टीम के सभी सदस्य कोरोना से निपटने के लिए बनाई गई टीम के प्रमुख को रिपोर्ट करेंगे। चार हफ्ते बाद अन्य 25 फीसद रेजिडेंट डॉक्टर अपनी सेवा देंगे। बाकी बचे 50 पर्सेंट रेजिडेंड डॉक्टरों का इस्तेमाल कैसे करना है, यह संबंधित विभाग के एचओडी तय करेंगे.

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