जब दुनिया चिकित्सा के बारे में कुछ नहीं जानती थी, तब भारत में सर्जरी हुआ करती थी : डॉ फरौली

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दुनिया भर में जितने भी अविष्कार हुए, सबका श्रेय विदेशियों ने ले लिया, उन्होंने अविष्कारों को अपने नाम से पेटेंट भी करवा लिया, जबकि सच ये है की ये कथित महान वैज्ञानिक असल में चोर है, उदाहरण के लिए न्यूटन जो की एक चोर था, उसने भारतीय ग्रंथों में से ग्रुत्वकर्षण का सिद्धांत चुराए और यूरोप में हल्ला मचा दिया जी की मैंने खोज कर ली है अभी हाल ही में ब्रिटैन के मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने भी स्वीकार कर लिया की न्यूटन ने ग्रेविटी के सिद्धांत भारत से चुराए थे, पर भारत में यही पढ़ाया जाता है की ग्रेविटी तो न्यूटन ने खोजी, इसी तरह विमान का सिद्धांत, गणित के ढेरों सिद्धांत, चिकित्सा पद्धिति, इन तमाम सिद्धांतों को विदेशी चोरो ने हमारे ग्रंथो से चुराए, और ये बात धीरे धीरे विदेशी मूल के लोग भी स्वीकार  करने लगे है 



विदेशी मूल के लेखक डॉ डेविड फरौली ने भी स्वीकार किया है की सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी भारत में ही शुरू हुई थी, और भारत के ऋषि महान थे, क्यूंकि जब दुनिया के लोग सर्जरी और चिकित्सा के बारे में कुछ नहीं जानते थे, तब भारत में शुश्रुत ऋषि प्लास्टिक सर्जरी किया करते थे और उन्होंने तरह तरह के दवाइयों के अविष्कार भी किये थे डॉ डेविड फरौली ने ये भी कहा की आयुर्वेद में भी काफी जानकारियां मौजूद है, जिनकी मदद से विदेशी लोगों ने दावा ठोक दिया की उन्होंने दवाइयों का अविष्कार किया है, पर असल में ये चीजें तो भारत के ऋषि मुनियों की देन है 

आपको  बता दें की जब यूरोप में लोग आदि मानव की तरह घुमा करते थे, अमरीका तो था ही नहीं, तब भारत में शुश्रुत ऋषि प्लास्टिक सर्जरी कर दिया करते थे, वो अंगो को जोड़ देते थे, आँख भी बदल देते थे, ये तमाम चीजें आज बड़े बड़े अस्पतालों में डाक्टर करते है, पर हमे बताया जाता है की ये चीजें विदेशी वैज्ञानिको द्वारा सिखाई गयी, खोजी गयी, जो की असल में एक बड़ा झूठ है, क्यूंकि ये सब चीजें भारत में शुश्रुत ऋषि किया करते थे, और देर से ही सही विदेशी लोग भी इस सत्य को स्वीकार करने लगे है 

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