अभी अभी भारत नें उठाया बड़ा कदम, प्यासा म’रेगा पा’किस्तान….?

ट्रेंडिंग
CopyAMP code

पंजाब से रावी नदी के बहाव को लेकर चर्चा एक बार फिर से शुरू हो गई है। कोरो’ना म’हामारी के बाद अब फिर से रावी के बहाव को कंट्रोल करने के लिए शाहपुरकंडी डैम को बनाने का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। ऐसे में ये संभावना जताई जा रही है कि 2022 तक इस डैम पर रावी नदी के पानी को रोककर झील बन जाएगी। इसके पा’कि’स्ता’न की तरफ जाने वाली रावी के पानी को कंट्रोल किया जा सकेगा।

CopyAMP code

पूरा करने का लक्ष्य 2022
ऐसे में केंद्र सरकार ने सन् 2018 में पा’किस्ता’न के साथ त’नातनी के दौरान भारत की नदियों के वहां की तरफ के बहाव को कम करने की बात कही थी। फिर इसके बाद वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने ज’म्मू-क’श्मीर और पंजाब के बॉर्डर पर रावी नदी पर शाहपुरकंडी बांध परियोजना को मंजूरी दी थी।

साथ ही इस परियोजना का पूरा करने का लक्ष्य 2022 तय किया गया था। जिसके चलते 2793 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार 485.38 करोड़ रुपये की सहायता भी कर रही है। को’रोना महा’मा’री के दौरान लॉ’कडाउ’न डैम के निर्माण का काम रोक दिया गया था।

डैम के निर्माण का काम
इसके अलावा कुछ ढील दिए जाने के बाद विभाग की ओर से शाहपुरकंडी डैम के निर्माण का काम 29 अप्रैल, 2020 को फिर शुरू किया गया। साथ ही परियोजना का काम अब जोरों पर चल रहा है। मुख्य डैम का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इससे पा’किस्ता’न की तरफ पानी के बहाव को कम करने में सहायता मिल सकेगी। ऐसे में संभावना ये जताई जा रही है कि 2022 तक डैम का काम पूरा हो जाएगा और रावी के पानी को रोककर झील बन जाएगी।

फिलहाल शाहपुरकंडी बांध प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2022 रखा गया है। ऐसे में रावी नदी पर बने रंजीत सागर बांध से बिजली बनाने के बाद छोड़े गए पानी को शाहपुरकंडी में बैराज बनाकर इकट्ठा किया जाना है। वहीं इसके अलावा 206 मेगावाट के छोटे पावर प्लांट भी लगने हैं।